
क्या ही कर लोगे ‘अब’ मुझे समझ कर;
बारिश का इंतज़ार करती हुई जमीं इस कदर सुख जाती है,
की अगर बूंदें गिरती भी है तो महसूस नहीं होती;
बस दरारों में फिसल जाती हे।
The Mist

क्या ही कर लोगे ‘अब’ मुझे समझ कर;
बारिश का इंतज़ार करती हुई जमीं इस कदर सुख जाती है,
की अगर बूंदें गिरती भी है तो महसूस नहीं होती;
बस दरारों में फिसल जाती हे।
The Mist
Leave a comment